Pran प्राण मुद्रा (हिंदी में)

प्राण का अर्थ है – जीवन! तो प्राण हस्त मुद्रा कहलायेगी- जीवनदायिनी! प्राण हस्त मुद्रा को कफ़ कारक ऐंवम पित्त नाशक हस्त मुद्रा के नामों से भी जाना जाता है! यह मुद्रा हमारे – प्राण, अपान, समान, व्यान ऐंवम उदान यानि पांचों प्राणों को मजबूत कर – हमारे समग्र मनोशारीरिक तंत्र को इम्मयून प्रदान कर – हमारी जीवन शक्ति को बढ़ाती है, जिस से हम न केवल हम संभावित रोगों से सवेंम को बचाए रख सकते हैं – वरन – प्राण मुद्रा के 20 मिनट के नियमित अभ्यास से- “itis” शब्द से समाप्त होने वाले जैसे सभी इन्फ्लेमेटरी इंफेक्शन सम्बंधित रोगों से भी छुटकारा पा सकते हैं। प्राण वायु, ब्रह्माण्ड-प्राण का वह विशेष कार्य है, जो मानव-शरीर को अनिवार्य ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है। इसकी ऊर्जा नासिका-छिद्रों से फेफड़ों के आस पास व हृदय-स्तर तक प्रवाहित होती है।

अच्छे स्वास्थ्य की प्राप्ति अच्छे भोजन, अच्छे वातावरण ऐंवम सँग में हमारी आन्तरिक प्रतिरोधक-शक्ति, आन्तरिक इच्छा – “आत्मबल”- आन्तरिक सामर्थ्य से ही सम्भव होता है। जब ‘आत्मबल’ अन्दर से दृढ़ होता है, तब बाहरी शक्तियां हमें यदा-कदा ही नुकसान पहुंचाती हैं। प्राण मुद्रा संग नाड़ी शोधन प्राणायाम अभ्यास द्वारा इस आत्मबल प्राण-शक्ति को सक्रिय कर, हमें इम्युनिटी प्राप्ति होती है!

आज के बिजी लाइफस्टाइल के चलते प्राण मुद्रा वो Panacia यानि Cure for All है जो डायबिटीज से लेकर डिप्रेशन तक की समस्याओं को दूर करने में मददगार है। प्राण हस्त मुद्रा शरीर में कफ और अग्नि दोषों को नियंत्रित करने में भलीभांति सक्षम है! बिन अत्योशक्ति कहे हम यूँ भी कह सकते हैं की डिप्रेशन-डायबिटीज जैसी 10 बीमारियों का रामबाण इलाज है प्राण मुद्रा!

प्राण हस्त मुद्रा के फायदे:-
1. पैनेशिया – “…. ITIS” शब्द से समाप्त होने वाली सभी बीमारियों हेतु – ए क्योर फ़ॉर ऑल द डिजीज ऐंवम मजबूत इम्युन सिस्टम प्रदान करे– मजबूत इम्यून सिस्टम
कमजोर इम्यून सिस्टम बार-बार सर्दी जुकाम, बुखार और अन्य बीमारियों का कारण बनता है। प्राण हस्त मुुद्रा करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। साथ ही प्राण मुद्रा पुरानी चक्कर की समस्या और कमजोरी व हर बीमारी को ठीक करने में मदद करता है।

2. फिनिशिंग मुद्रा:- किसी मुुद्रा के

2. शुगर व डायबिटीज बैलेंस:-
रोजाना दिन में नियमित अभ्यास से प्राण मुद्रा का अभ्यास अगर लंबे समय तक किया जाए तो इंसुलिन स्तर बैलेंस रह डायबिटीज कंट्रोल में रहती है व रक्त साफ रहता है।

3. भूख प्यास व वजन नियंत्रण:-
दरअसल, इस योग मुद्रा में भूख और प्यास कंट्रोल होती है, जिससे आप ओवरइटिंग से बच जाते हैं और वजन कंट्रोल में रहता है। यह योग मेटाबॉलिज्म दर को भी बढ़ाता है, जो वसा को खत्म करने में मदद करता है। इसके अलावा यह आपके पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है।

आंखों की रोशनी बढ़ाने में मददगार
नियमित रूप से प्राण मुद्रा करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। इतना ही नहीं, अगर आपको चश्मा लगा है आंखों से जुड़ी कोई अन्य परेशानी है तो वो भी इससे दूर हो जाएगी।

मजबूत इम्यून सिस्टम
कमजोर इम्यून सिस्टम बार-बार सर्दी जुकाम, बुखार और अन्य बीमारियों का कारण बनता है लेकिन इस आसन को करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। साथ ही प्राण मुद्रा पुरानी चक्कर की समस्या और कमजोरी को ठीक करने में मदद करता है।

पीरियड्स दर्द को करे दूर
जिन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान तेज दर्द का सामना करना पड़ता है उनके लिए यह बेस्ट ऑप्शन है। इस आसन को करने से पीरियड्स दर्द, चिड़चिड़ापन और थकान आदि सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

थकान तनाव डिप्रेशन दूर करने में सहायक:-
नियमित रूप से इस मुद्रा को करने पर मानसिक एकाग्रता और सहनशक्ति बढ़ती है, जिससे तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी दूर होती है।

कोलेस्ट्रॉल लेवल को करे कंट्रोल
इस आसन को करने से कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कंट्रोल में रहता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। तो आप भी इसे अपनी रूटीन में जरूर शामिल करें।

त्वचा रोग में फायदेमंद
यह योग त्वचा रोगों को भी ठीक करता है। इससे त्वचा में लाल चकत्ते पड़ना, रैशेज, पित्ती आदि रोग ठीक हो जाते हैं। इतना ही नहीं, यह योग करने से शरीर में विटामिन्स की कमी भी पूरी हो जाती है।

शरीर को मिलती है ऊर्जा
रोजाना 20+ मिनट प्राण मुद्रा का अभ्यास करने से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है और कार्बन-डाईऑक्साइड बाहर निकलती है। इससे शरीर को दिनभर ऊर्जा मिलती है, जिससे आप कई बीमारियों से बचे रहते हैं।

ग्लोइंग स्किन
चेहरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए महिलाएं बहुत से ब्यूटी प्रॉडक्टस का इस्तेमाल करती हैं लेकिन रोजाना यह आसन करके भी आप चेहरे का ग्लो बरकरार रख सकती हैं वो भी बिना किसी साइड इफैक्ट के।

सावधानियां:
कफ़ प्ररकर्ति हो व आपको सर्दी और जुकाम हैं तो इस मुद्रा को कम समय के लिए करें।

प्राण मुद्रा निर्माण विधि:- दोनों हाथों की कनिष्टिका- चिच्ची के ऊपरी पौरों-टिप्स ऐंवम अनामिका-रिंग फिंगर्स को अंगूठों के ऊपरी पौरों को आराम से मिलाकर रखने से प्राण मुद्रा का निर्माण होता है!

समय अवधि:- न्यूूूनतम न में एक बार से तीन बार तक 16 मिनट अथवा 24 मिनट दो समय अथवा 48 मिनट तक एक दफ़ा।

Hallo group presentation :- जानें, प्राण मुद्रा करने का सही तरीका और इसके फायदे चिकित्सक द्वारा समीक्षित Dr. Pranali Patil | द्वारा shalu प्राण मुद्रा/Prana Mudra steps and benefits आपने योग के कई रूप और शक्ति के बारे में सुना होगा। आज हम योग के एक ऐसे आसन के बारे में बात करेंगे। जो वास्तव में ऊर्जा का भंडार है। आज हम प्राण मुद्रा के बारे में बात करने वाले हैं। प्राण मुद्रा का अर्थ है “ऊर्जा या जीवन की आत्मा”। प्रकृति के संतुलन को बनाए रखने के लिए सभी ऊर्जाओं के बीच प्राण बहुत अधिक महत्व रखते हैं। इस आसन को करने का कोई सटीक समय नहीं है। हालांकि, अकेले और शांत जगह में इस मुद्रा को करना एक बेहतर विकल्प हो सकता है। इस मुद्रा को शांत कमरे में करने से आपके शरीर में ऊर्जा का संचार होता है। प्राचीन काल में किए गए शोध के अनुसार, प्राण मुद्रा व्यक्तिगत जीवन शैली का एक अनिवार्य हिस्सा था। यह चिकित्सा समस्याओं का विकल्प नहीं है, लेकिन शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक मुद्दों को ठीक करने के लिए लाभदायक सिद्ध हो सकता है। प्राण मुद्रा सबसे महत्वपूर्ण मुद्राओं में से एक है क्योंकि यह शरीर में ऊर्जा की मात्रा को बढ़ाने में मदद करता है। योग क्या है? बहुत से लोग योग को एक्सरसाइज मानते हैं,लेकिन आपको बता दें कि योग एक ऐसी क्रिया है,जो सबसे अधिक ऊर्जा यानि पावर का केंद्र है। एक्सरसाइज और इससे जुड़े सभी व्यायामों को योग का एक हिस्सा माना जाता है। योग केवल फिट होने के लिए नहीं किया जाता है। यह आपको ऊपरी और आंतरिक रूप से मजबूत बनाता है। इससे बीमार पड़ने की संभावना कम होती है। साथ ही एक्सरसाइज आपको फिट रखने में भी मदद करता है। आपको बता दें कि योग का नाम संस्कृत शब्द “युज” से लिया गया है। यहां इसका मतलब है मानव की आत्मा का लौकिक चेतना से मिलन। योग न केवल शरीर बल्कि मनुष्य के मन और आत्मा को भी स्वस्थ बनाता है। योग हमारे देश के लिए नया नहीं है बल्कि यह पांच हजार साल पुराना पद्धति है। यह बात साबित हो चुकी है कि कुछ बीमारियों के उपचार के लिए यह बेहद फायदेमंद साबित हो सकता है। मधुमेह, हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा, कैंसर और भी बहुत कुछ… प्राण मुद्रा का अर्थ क्या है? प्राण मुद्रा पद्मासन के साथ योग का एक हिस्सा है। अधिकांश लोग इसे “जीवन का मुद्रा” कहते हैं, क्योंकि यह बहुत ही महत्वपूर्ण जीवन शक्ति है। प्राण का अर्थ ‘ऊर्जा’ या जीवन होता है। प्राण मुद्रा रूट चक्र को उत्तेजित करती है, जिससे कंपन और गर्मी होती है, जो शरीर को जागृत और सक्रिय करती है। यह आपके शरीर को सक्रिय और सभी अंगों को एक्टिव करती है। यह मुद्रा व्यक्ति को हृदय और आत्मा से जोड़ती है। प्राण हस्त मुद्रा योग कई प्रकार के रोगों के उपचार के लिए व्यापक रूप से अभ्यास किया जाने वाला मुद्रा योग है। प्राण मुद्रा और भी कई नामों से जाना जाता है। आइए जानते हैं, प्राण आसन के बाकी नाम क्या हैं। प्राण मुद्रा (Pran Mudra) कपहा-कारक मुद्रा(Kapha-Kaarak Mudra) पित्त-नाशक मुद्रा(Pitta-Nashak Mudra) जीवन ऊर्जा मुद्रा (Life Energy Mudra) ऊर्जावान हाथ योग(Energizing Hand Yoga) प्राण मुद्रा कैसे करें? इस मुद्रा को दोनों हाथों की मदद से किया जाता है। सबसे पहले आप अपनी रिंग फिंगर और लिटिल फिंगर को अंगूठे से जोड़ें। अन्य सभी उंगलियां सीधी हों। प्राण मुद्रा शरीर में ऊर्जा का संचार करती है, इसको करने के दौरान आपको अपने हाथ की मुद्रा के साथ-साथ सांस लेने और छोड़ने की प्रक्रिया को जारी रखना होगा। इस दौरान अपनी रीढ़, सिर और पीठ को बिल्कुल सीधी स्थिति में रखें। प्राण मुद्रा करते समय, आपको एक गहरी और नियमित सांस लेने की आवश्यकता होती है। इस दौरान आप एक ही अवधि में अंदर और बाहर सांस लें। इस क्रिया को करते समय आप मन में किसी प्रकार का मंत्र गा सकते हैं। सांस छोड़ते पर ‘सो’ और ‘हम्म’ कह कर जप कर सकते हैं। हालांकि, शुरू में ही आपको इसके साथ-साथ इनहेल-एक्सहेल का जाप करना मुश्किल होगा। अभ्यास के साथ आप इसे ठीक तरह से कर पाएंगे। इस क्रिया को करते हुए लगभग 20 से 30 बार सांस ले और छोड़ें। अब अपने दिमाग पर ध्यान देने की कोशिश करें। आप अपने शरीर में अचानक कंपन महसूस करेंगे, एक स्थिति पर आकर आपका शरीर हल्का महसूस होने लगेगा। आप प्राण मुद्रा को करते हुए इसके परिणाम को अचानक महसूस करेंगे। यह अभ्यास करते समय आपको एकाग्रचित होकर यह आसन करने की आवश्यकता है। जिसके बाद ही आप अपने शरीर में ऊर्जा महसूस कर सकते हैं। प्राण मुद्रा के लाभ क्या-क्या हो सकते हैं? प्राण मुद्रा के लाभ निम्नलिखित हो सकते हैं। जैसे: प्राण आसन से आपको कई तरह के लाभ हो सकते हैं। जो शरीर की बीमारी को दूर करने के साथ-साथ शरीर में कई तरह की ऊर्जा भरता है। प्राण मुद्रा किसी भी तरह के विटामिन-ए, विटामिन-बी, विटामिन-सी, विटामिन-डी, विटामिन-ई, विटामिन-के की कमी को दूर करने में मदद करती है। प्राण आसन हाथ की उंगलियों द्वारा किया जाता है। इसलिए यह मुद्रा आपके भूख और प्यास को नियंत्रित करने में सहायता करता है। अगर आपको बार-बार भूख लगने की समस्या रहती है, तो यह आसन आपके लिए अत्यंत लाभकारी है। प्राण मुद्रा आपकी थकावट को दूर करने में मददगार है। सामान्य कमजोरी की समस्या को दूर करने के साथ-साथ आपका धैर्य बनाए रखने में सहायता करती है। इससे मन की शक्ति में सुधार होता है। यह खाने और नींद की बीमारी की अनियमित आदतों से निपटने में मदद कर सकता है। इंसोमेनिया (Insomnia) की समस्या होती है दूर। प्राण मुद्रा को नियमित रूप से करने से मानसिक तनाव, ईर्ष्या, चंचलता, गर्व, बेचैनी और खुशी, आनंद, इच्छा, ऊर्जा और उत्साह को पुनर्जीवित करने के लिए भावनाओं को प्रबंधित करने में मदद मिलती है। अगर आपको मानसिक तनाव रहता है, एंग्जाइटी की समस्या रहती है या किसी भी अन्य कारण से आप परेशान रहते हैं, तो प्राण मुद्रा आपकी इनसभी परेशानियों को दूर करने में आपकी सहायता करेगा। यह मुद्रा आपके ध्यान और मन की शक्ति को बनाए रखने में मददगार साबित हो सकता है। अगर आपको ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है और आपका मन किसी कार्य में नहीं लगता है, तो इस मुद्रा को नियमित करें। इससे जल्द लाभ होगा। प्राण मुद्रा से पेट में जलन की समस्या से भी राहत मिलती है। इस मुद्रा में किए जाने वाले आसन आपके शरीर की सभी नसों से जुड़े होते हैं। तो पेट की समस्या वाले लोगों को प्राण मुद्रा नियमित रूप से करने से बहुत फायदा मिल सकता है। प्राण मुद्रा से कब्ज और एसिडिटी की समस्या से भी राहत मिलती है। यदि आपके अंदर आत्मविश्वास की कमी है, आप बहुत जल्दी घबरा जाते हैं। तो प्राण मुद्रा आपकी घबराहट को कम करता है, जिससे आत्मविश्वास में सुधार होता है। इस मुद्रा से नसों में रक्त प्रवाह बेहतर बना रहता है। रक्त प्रवाह बेहतर होने से शरीर स्वस्थ्य रहता है। यह आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ाने की शक्ति भी रखता है। ध्यान दें की अगर आप बार-बार बीमार पड़ते हैं, तो इसका अर्थ है की आपकी इम्यून पावर कमजोर है। इसलिए हेल्दी डायट के साथ-साथ प्राण मुद्रा का सहारा लेना आपको किसी भी बीमारियों से बचा कर रख सकता है। यह मुद्रा आंखों के लिए बहुत लाभदायक होता है। यदि आपकी आंखों में जलन हो रही है। तो यह आंखों की जलन को कम करने में बहुत मददगार साबित हो सकता है। प्राण मुद्रा आंखों से संबंधित बीमारी मोतियाबिंद और ड्राई आई का उपचार करने में मदद कर सकती है। इस मुद्रा से पृथ्वी, जल, और अग्नि ये तत्व जुड़े होते हैं, इसलिए यह रक्त में मौजूद समस्याओं और अशुद्धियों को दूर करने में मदद करती है, जिससे रक्त में वृद्धि होती है। इस बीमारी से पैरों और मांसपेशियों में किसी भी तरह का ऐंठन ठीक हो जाता है। आंखों से जुड़ी समस्याओं के लिए प्राण योग मुद्रा बेहद उपयोगी है। कम दृष्टि वाले लोगों को हमेशा 15 से 30 मिनट के लिए हर मुद्रा में प्राण मुद्रा करनी चाहिए। प्राण आसन आंखों से संबंधित किसी भी तरह की समस्या के लिए बेहद मददगार है। यह आंखों की शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है,जिन लोगों को आंखों की समस्या के कारण चश्मा लगा होता है, इसको नियमित रूप से करने पर इस समस्या से निजात मिल सकता है। यह मुद्रा त्वचा संबंधी रोगों को भी ठीक करने में भी माहिर होती है। यदि आपकी त्वचा में किसी प्रकार के त्वचा पर चकत्ते, पित्ती आदि है तो इस मुद्रा से यह रोग ठीक होते है। प्राण मुद्रा करने से मूत्र मार्ग में जलन होने की समस्या से भी आराम मिल सकता है। मूत्र मार्ग में जलन की समस्या वाले लोगों को प्राण मुद्रा नियमित रूप से करने से बहुत फायदा मिल सकता है। ऊपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। इसलिए किसी भी योग, दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें. कुछ लोगों के शरीर से बहुत दुर्गंधयुक्त पसीना निकलता है। जिससे उनको बहुत शर्मिंदगी महसूस होती है। लेकिन प्राण मुद्रा करने से उन लोगों को इस समस्या से बहुत राहत महसूस हो सकता है। प्राण मुद्रा उच्च रक्तचाप के मरीजों के लिए भी यह एक बेहतर आसन माना जाता है। यदि आपको छोटी छोटी बात पर बहुत अधिक क्रोध आता है साथ ही चिड़चिड़ापन महसूस होता है तो इस मुद्रा को करने से आपको इन समस्याओं से भी राहत मिल जाती है। प्राण मुद्रा थायराइड के रोगियों के लिए भी बहुत उपयोगी माना जाता है। इसको नियमित रूप से करने से आपका थॉयराइड कंट्रोल रहता है। प्राण मुद्रा को नियमित रूप से करने से जोड़ों में अस्थिरता बनी रहती है। यदि आपको किसी प्रकार से भूलने की बीमारी है तो, प्राण मुद्रा का प्रतिदिन अभ्यास करने से आपकी भूलने की आदत में बदलाव आ सकता है। बहुत से लोगों को अनिद्रा की समस्या होती है। ऐसे में यदि आपको भी नींद न आने की दिक्कत है, तो आपके लिए प्राण मुद्रा बहुत फायदेमंद हो सकता है। अनिद्रा की समस्या वाले लोगों को प्राण मुद्रा नियमित रूप से करनी चाहिए। कुछ ही दिनों में आपको बदलाव महसूस होने लगेगा। और पढ़ें :रोज करेंगे योग तो दूर होंगे ये रोग, जानिए किस बीमारी के लिए कौन-सा योगासन है बेस्ट जो लोग पीलिया से ग्रसित है, वो प्राण आसन करके इसका लाभ प्राप्त कर सकते हैं। आपने अपने आस-पास ऐसे बहुत से लोगों को देखा होगा, जिनको समय से पहले बुढ़ापा आ जाता है। तो आपको बता दें, कि प्राण मुद्रा करने से आप लंबे समय तक खुद को यंग रख सकते हैं। यह आपको बहुत जल्दी बुढ़ापे के करीब जाने से रोकता है। प्राण मुद्रा करते समय किस तरह की सावधानियां बरतें? प्राण मुद्रा के दौरान निम्नलिखित सावधानियां बरतें जैसे:- जिन लोगों को सर्दी या जुकाम हुआ है,उन लोगों को प्राण मुद्रा करने से बचना चाहिए। यदि आपको पीठ की समस्या है, तो इस मुद्रा को न करें। प्राण मुद्रा करते समय सावधान रहें। इसे करने से पहले अच्छी तरह से सीख लें। अपनी उंगलियों को बहुत तेजी से न दबाएं, बहुत आराम से प्रेस करें। पद्मासन मुद्रा में प्राण मुद्रा करने से अधिकतम लाभ मिल सकते हैं। किसी भी समय यह आसन को करने के बजाये एक समय निर्धारित कर लें और उसी वक्त पर रोजाना करें। स्तनपान कराने वाली महिलाओं को किसी योग विशेषज्ञ से सलाह लेने के बाद ही इस मुद्रा का अभ्यास करनी चाहिए। प्राण मुद्रा रोजाना 15 से 20 मिनट दो बार करें या एक ही बार 30 से 40 मिनट तक किया जा सकता है। शुरुआती दिनों में दस मिनट से शुरुआत कर धीरे-धीरे टाइम पीरियड को बढ़ाया जा सकता है। प्राण मुद्रा की सबसे खास बात और अच्छी बात यह है की इसे किसी भी उम्र के लोग कर सकते हैं। गर्भवती महिला भी प्राण मुद्रा नियमित रूप से कर सकती हैं। अगर आप किसी डिजीज से भी पीड़ित हैं, तो भी प्राण मुद्रा कर सकते हैं। इससे शारीरिक नुकसान नहीं होगा। ऊपर दी गई जानकारी चिकित्सा सलाह का विकल्प नहीं है। अगर आप प्राण मुद्रा से जुड़े किसी तरह के कोई सवाल का जवाब जानना चाहते हैं, तो विशेषज्ञों से समझना बेहतर होगा। इसके साथ ही किसी भी योग, दवा या सप्लिमेंट का इस्तेमाल करने से पहले डॉक्टर से परामर्श जरूर करें। हैलो हेल्थ ग्रुप चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार प्रदान नहीं करता है

Popularly known as Praan mudra. The word “Pran” means life. The practice of Pran Mudra strengthens all the five pran in our body.It is useful to increase the pranic energy (vital force) and also enhance immunity and vitality.The practice of Pran mudra increases Earth element, Water element, Kapha humor and also reduce fire element and Pitta humor.

This Mudra is also known as

1.Pran Mudra.

2.Kapha Karak Mudra.

3.Pitta-nashak Mudra

Method:

This mudra is formed by joining together the tips of the thumb, the ring finger and the little finger of both the hands.For optimum results one has to do this mudra for 45 min in meditative poses like Padmasan OR Sukhasan especially in the morning hours. But if not possible then can be done in 3 parts of 15 min during day. It is better that If you practice Vata nashak mudra combined with this mudra.

▪ Chronic fatigue, general debility, low endurance

▪ Impaired immunity (tendency to contract infectious diseases)

▪ Mental tension, anger, irritability, jealousness, pride, impatience, chronic sense of time-urgency

▪ Forgetfulness

▪ Intolerance of heat, stress and noise; ailments which get worse in summer

▪ Hyperthyroidism (weight-loss despite having good appetite)

▪ Inflammatory disorders (diseases ending with ‘itis’)

▪ Sleeplessness; light/disturbed sleep

▪ High blood pressure, athero-sclerosis (hardening and narrowing of arteries)

▪ Burning in the mouth, throat, stomach; apthous ulcers, acidity, ulcerative colitis

▪ Loose, bloody stools; dysentery

▪ Scanty, burning urination

▪ Excessive, foul-smelling perspiration

▪ Excessive, painful menses

▪ Red-hot joints; Rheumatoid Arthritis; instability of joints

▪ Burning, red, dry yes; Cataract

▪ Dry, red, hot, ageing, skin; skin-rashes;urticaria, leprosy

▪ Dry, sparse, grey hair

▪ Jaundice

▪ Premature aging

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