वैदिक बीजमंत्र- चक्र – सुषम्ना – कुंडलिनी सम्बंध

राम:- “र” + “आ” + “म”

“र” यानि सूर्य – प्रत्यक्ष चेतन रूप में हमें हमारे अंदर से प्रकाशित करने वाले ऐंवम हमारा पोषन करने वाले श्री विष्णु भगवान।

“आ” यानि अग्नि – जो हमारे दुर्गुणों ऐंवम पाप कृत्यों को भस्म करती है, व हमें पवित्र बनने में मदद करती है! हमारे भोजन को पचा – हमारे पोषण में सहायक है! ये हमारे मणिपुर चक्र की ज्वाला है जो सदैव उर्ध्वगामी हो – कुंडलिनी वाहक सुषम्ना को अनाहत चक्र की ओर अग्रसित करती है!

“म” यानि चन्द्र अमृत वर्षा: म उच्चारण करते ही – चन्द्र अमृत किरणें हमें शीतलता प्रदान कर – स्थाई शांति की प्राप्ति होती है जो फिर बाहर नहीं निकलती क्योंकि म उच्चारण करते ही हमारे होंठ स्वतः ही लॉक्ड हो जाते हैं! दूसरे, चन्द्र से जल की प्राप्ति होती है व हम जानते हैं की जल ही जीवन है- अतः “म” – जीवन दाई है!

रा – “म” मंत्र में – म से इड़ा नाड़ी यानि चन्द्र स्वर ऐंवम “रा’ से पिंगला यानि सूर्य स्वर के संयुक्त उच्चारण से इड़ा पिंगला का संतुलन हो – हमारे मस्तिष्क के Sympathetic Nervous System ऐंवम Parasympathetic Nervous Systems का एकीकरण प्रारंभ होने लग जाने से Central Nervous System balanced होने लगता है या यूं कहें की इड़ा पिंगला के एकीकरण प्रक्रिया प्रारंभ होने से ‘सुषम्ना नाड़ी” का स्वतः ही एक्टिवशन होने लग जाता है!

“राम” नाम ध्यान का पहला द्वार…

गोस्वामी तुलसीदास ने रामचरित मानस के बालकाण्ड में साकार और निराकार से अधिक महत्वपूर्ण राम के नाम को माना है..नाम की महिमा हमारे शास्त्रों में खूब बताई गई है…यह जपा और अजपा दोनों रूपों में आपके आत्मबोध का अंग बन जाता है.. नाम की महिमा अपरम्पार है..यह ध्यान का पहला द्वार है..! पर इसमें भी गुरु का मार्ग दर्शन मिल जाये तो और भी बेहतर..बिना गुरु के कोई भी साधना गलत दिशा में ले जा सकती है..और गुरू भी खोजने से नहीं मिलता…प्रबल संस्कारों से मिलता है..। जय जय हनुमान गोसाईं – कृपा करें गुरुदेव की नाईं जप करने से भी गुरु कृपा सम्भव है! भाग्य और प्रारब्ध दो मार्ग है, जिसका माध्यम कर्म है…और यह कर्म ध्यान से जुडा है…ध्यान नाम से..

हरे राम हरे कृष्ण महामंत्र में –

“ह” उच्चारण में विशुद्ध चक्र एक्टिवेशन हेतु प्रयुक्त होने वाले- “हं” बीज मंत्र की ध्वनि सम्मलित होने से “आकाश तत्त्व ऐंवम विशुद्ध चक्र (Throat)” का स्वतः ही एक्टिवेशन होने लगता है! विशुद्ध चक्र जागृत होने से – मानव जीवन में ‘वाक्य’ शुद्धिकरण हो जाने से, ऊपर के आज्ञा व सहस्रार तथा निचले अनाहत चक्रों में भी स्वतः ही सन्तुलन प्रक्रिया शुरू हो जाती है!

“र” उच्चारण में मणिपुर चक्र जागरण हेतु प्रयुक्त होने वाले “रं” बीजमन्त्र की ध्वनि सम्मलित होने से “अग्नी तत्त्व ऐंवम मणिपुर चक्र Solar Plexus” का जागरण भी स्वतः ही होने लगता है तथा जागृत मणिपुर चक्र द्वारा- निचले – स्वाधिस्ठान ऐंवम मूलाधार चक्रों को भी जागृत करने की प्रक्रिया भी स्वतः ही प्रारंभ होने लग जाती है!

“र” उच्चारण से एक लाभ यह भी मिलता है की – मणिपुर चक्र में जो यज्ञ रूपी अग्नि ज्वाला प्रज्जलित होती है वो उस की फ्लेमस सदैव ऊपर की ओर ही जाती हैं तो – चक्रों में समाहित सुषम्ना ऐंवम सुषम्ना में समाहित कुंडलिनी शक्ति भी उर्द्धगवामी हो – अनाहत चक्र में सुगमता से प्रविष्ट होने लग जाती है!

“र” उच्चारण से सोलर चक्र के जागरण होने लगने से हमारी सांसारिक ऐंवम आध्यात्मिक उन्नति से जो कभी कभार हमारे जीवन में “कर्ता भाव यानि EGO” आ जाती है – वो भी भस्म हो, हमारे भीतर – प्रभु सम्मुख – आत्मसमर्पण की भावना उत्पन्न हो – हमारी चक्र सुषम्ना कुंडलिनी यात्रा सुगम बनने लग – हमारा कल्याण उद्धार होने लगता है!

कृष्ण बीज मंत्र के सन्धिविछेदन से उत्पन्न “कृ तथा ष्ण” बीजमन्त्र, हमारा निम्न प्रकार से रागमुक्त मानसिक ऐंवम रोगमुक्त भैतिक शारिरिक कल्याण होता है -जैसे की इस महामन्त्र व नाड़ीशोधन अभ्यास से हमारे”घुटने दर्द” ठीक होने में

“कृ” से हमारे “मनोशारीरिक” स्वभाव में फ्लेक्सिबिलिटी, एडपटिबिलिटी की भावना जागृत होती है व “ष्ण” से लैट गो ऑफ एवरी थिंग भाव उत्पन्न होने से हमारे मनोशारीरिक स्वभाव में उत्पन्न ऐंवम अनावश्यक एकत्रित भाव, टॉक्सिन्स – एरोगेंस – ईगो – “मैं’ व कर्ता भाव समाप्त हो – आत्मशुद्धि होती है!

“SREE RAM JAYA RAM JAYA JAYA RAM”
Meaning of the individual words in this mantra:
Sree means respect to the divine. RA is the sound, the creator of all sounds. RA is as powerful as 12 suns. We have only one sun. But the word has inside it the energy of 12 suns. It generates so much vibration. That’s why it’s an all-pervading and all-powerful mantra. Our ancestors described the figure of RA. They say it has countless faces and legs.
Repeated recitation of the word MA can even help you in your next life. Jaya Ram à JA destroys all mental and physical sufferings
YA in Jaya and in RAM – M make you accomplish anything. You can cross any difficulties in life.

A Few Wishfulfilment Beeja Mantras:

OM Lalitam Lambodaram– chanting helps in solving problems and to achieve goal without obstacles

OM Lalitam Shridharam
OM Lalitam Bhaskaram
OM Lalitam Sudarshanam

OM Lalitam SadaShivam

OM Lalitam ChandraShekhram

Use:– To settle debts, attract money, get job, do well in life, remove sins, be happy,

chant this mantra for more than 2000 times a day!

NamahShivayam- to solve any kind of roblem – no matter how big, chant this mantra with full faith and devotion, more than 2000 times or more a day!

OM Howm Vum Joom Saha to get prevented and healed from diseases like cancer, swine flue!

And no matter how big disease is – this mantra protects us from major disease and natural calamities like earthquakes even by chanting this more than 1000 times a day!

💐 ॐ के उच्चारण का रहस्य💐

ॐ को ओम लिखने की मजबूरी है अन्यथा तो यह ॐ ही है। अब आप ही सोचे इसे कैसे उच्चारित करें? ओम का यह चिन्ह ‘ॐ’ अद्भुत है। यह संपूर्ण ब्रह्मांड का प्रतीक है। बहुत-सी आकाश गंगाएँ इसी तरह फैली हुई है। ब्रह्म का अर्थ होता है विस्तार, फैलाव और फैलना। ओंकार ध्वनि के 100 से भी अधिक अर्थ दिए गए हैं। यह अनादि और अनंत तथा निर्वाण की अवस्था का प्रतीक है।

आइंसटाइन भी यही कह कर गए हैं कि ब्राह्मांड फैल रहा है। आइंसटाइन से पूर्व भगवान महावीर ने कहा था। महावीर से पूर्व वेदों में इसका उल्लेख मिलता है। महावीर ने वेदों को पढ़कर नहीं कहा, उन्होंने तो ध्यान की अतल गहराइयों में उतर कर देखा तब कहा।

ॐ को ओम कहा जाता है। उसमें भी बोलते वक्त ‘ओ’ पर ज्यादा जोर होता है। इसे प्रणव मंत्र भी कहते हैं। यही है √ मंत्र बाकी सभी × है। इस मंत्र का प्रारंभ है अंत नहीं। यह ब्रह्मांड की अनाहत ध्वनि है। अनाहत अर्थात किसी भी प्रकार की टकराहट या दो चीजों या हाथों के संयोग के उत्पन्न ध्वनि नहीं। इसे अनहद भी कहते हैं। संपूर्ण ब्रह्मांड में यह अनवरत जारी है।

तपस्वी और ध्यानियों ने जब ध्यान की गहरी अवस्था में सुना की कोई एक ऐसी ध्वनि है जो लगातार सुनाई देती रहती है शरीर के भीतर भी और बाहर भी। हर कहीं, वही ध्वनि निरंतर जारी है और उसे सुनते रहने से मन और आत्मा शांती महसूस करती है तो उन्होंने उस ध्वनि को नाम दिया ओम।

साधारण मनुष्य उस ध्वनि को सुन नहीं सकता, लेकिन जो भी ओम का उच्चारण करता रहता है उसके आसपास सकारात्मक ऊर्जा का विकास होने लगता है। फिर भी उस ध्वनि को सुनने के लिए तो पूर्णत: मौन और ध्यान में होना जरूरी है। जो भी उस ध्वनि को सुनने लगता है वह परमात्मा से सीधा जुड़ने लगता है। परमात्मा से जुड़ने का साधारण तरीका है ॐ का उच्चारण करते रहना।

*त्रिदेव और त्रेलोक्य का प्रतीक :
ॐ शब्द तीन ध्वनियों से बना हुआ है- अ, उ, म इन तीनों ध्वनियों का अर्थ उपनिषद में भी आता है। यह ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक भी है और यह भू: लोक, भूव: लोक और स्वर्ग लोग का प्रतीक है।

*बीमारी दूर भगाएँ : तंत्र योग में एकाक्षर मंत्रों का भी विशेष महत्व है। देवनागरी लिपि के प्रत्येक शब्द में अनुस्वार लगाकर उन्हें मंत्र का स्वरूप दिया गया है। उदाहरण के तौर पर कं, खं, गं, घं आदि। इसी तरह श्रीं, क्लीं, ह्रीं, हूं, फट् आदि भी एकाक्षरी मंत्रों में गिने जाते हैं।

सभी मंत्रों का उच्चारण जीभ, होंठ, तालू, दाँत, कंठ और फेफड़ों से निकलने वाली वायु के सम्मिलित प्रभाव से संभव होता है। इससे निकलने वाली ध्वनि शरीर के सभी चक्रों और हारमोन स्राव करने वाली ग्रंथियों से टकराती है। इन ग्रंथिंयों के स्राव को नियंत्रित करके बीमारियों को दूर भगाया जा सकता है।

*उच्चारण की विधि : प्रातः उठकर पवित्र होकर ओंकार ध्वनि का उच्चारण करें। ॐ का उच्चारण पद्मासन, अर्धपद्मासन, सुखासन, वज्रासन में बैठकर कर सकते हैं। इसका उच्चारण 5, 7, 10, 21 बार अपने समयानुसार कर सकते हैं। ॐ जोर से बोल सकते हैं, धीरे-धीरे बोल सकते हैं। ॐ जप माला से भी कर सकते हैं।

*इसके लाभ : इससे शरीर और मन को एकाग्र करने में मदद मिलेगी। दिल की धड़कन और रक्तसंचार व्यवस्थित होगा। इससे मानसिक बीमारियाँ दूर होती हैं। काम करने की शक्ति बढ़ जाती है। इसका उच्चारण करने वाला और इसे सुनने वाला दोनों ही लाभांवित होते हैं। इसके उच्चारण में पवित्रता का ध्यान रखा जाता है।

*शरीर में आवेगों का उतार-चढ़ाव :
प्रिय या अप्रिय शब्दों की ध्वनि से श्रोता और वक्ता दोनों हर्ष, विषाद, क्रोध, घृणा, भय तथा कामेच्छा के आवेगों को महसूस करते हैं। अप्रिय शब्दों से निकलने वाली ध्वनि से मस्तिष्क में उत्पन्न काम, क्रोध, मोह, भय लोभ आदि की भावना से दिल की धड़कन तेज हो जाती है जिससे रक्त में ‘टॉक्सिक’ पदार्थ पैदा होने लगते हैं। इसी तरह प्रिय और मंगलमय शब्दों की ध्वनि मस्तिष्क, हृदय और रक्त पर अमृत की तरह आल्हादकारी रसायन की वर्षा करती है।

Chant:” Lalitham Lambodharam”- Removes obstacles, makes life smooth.
Chant:” Lalitham Sadashivam Lalitham Chandrashekharam”- For wealth, removes negative energy that had been stored.
Chant:” Om Kleem Krishnaya Namaha”- Makes Life Lovely, abundances, wealth, good fortune.
Chant:” Kala Handri Sarva Vyathi Prashamini Kala Handri Sarva Mrityur Nivarani”- Solves many problems.
Chant:” Durga Durgama Dosavarjitha Durachara Samani”- Removes all negative energy.
Chant:” Om Ham Namaha”- Makes spacious, helps to restore flow.
Chant:” Hari Haraya Namaha Om” – Removes Dillusion, love pangs etc.
Chant:” Om im indiraya Namaha”- For not to be cheated, removes dillusion of mind.
Chant:” Udhanaya Swaha”- Removes Stagnant energy out, makes work done.
Chant:” Srinivasa Arvindalochana”- Removes blocks.
Chant:” Kunjitha Padam Saranam”- Good For health.
Chant:” Namashivayam”- For calmness, Happiness, Manifests Desires Faster.
Chant : ” Hare Rama Hare Krishna”- For overall general well being.
Chant:” Ramam Manoharam Manoharam Ramam”- Heals all chakras, for abundance.
Chant:” Jai Raghu Veera Jai Raghu Rama”- Removes negativity.
Chant:” Ravi Kiran Ruchi Karan Paripoornan”- For Bright life, removes Lethargy, Laziness, attracts Wealth, Cash.
Chant:” Bhaskaram Prabodham”- Attracts Wealth/Cash instantly.
Chant:” Ambika Anadhi Nithana Aswarodha Aaparajitha”- Makes one winner and successful in all areas of life, very good for business too.
Chant:” Lalitham Subramanyam Lalitham Kumaram Lalitham Shanmugham”- For Loving relationship.
Chant:” Om Vum Namaha, Om Hum Namaha, Om Yum Namaha”- Removes Stagnations.
Chant:” Udhanaya Swaha”- When something is not working despite of trying, this Solves it.
Chant:” Lalitham Sridharam”- Removes Debts.
Chant: ” Om Gum Ganapataye Namaha”- Attracts Respect, makes life smooth, for wealth.
Chant: ” Om Dakiniye Namaha”- This mantra fixes issues related to money, security.
Chant:” Lalitham Sridharam Lalitham Bhaskaram Lalitham Sudarshanam”- This mantra removes all debts.
——- Ladies Not to chant above mantras on Periods, not to chant over water either——

Chant:” Aspen, Pine” – Removes phobias, superstitious or unrelevant beliefs.
Chant:” Walnut, Honey Suckle, Rock Water, Water Violet, Gorse, 9 Gems, Peridot, Citrine, Tourmaline, Green Aventurine, Hawai Hibiscus Flower, Pearl, Coral, Turquoise, Rutile Quartz, Tiger Eye Stone, Agate, Amazonite, Elm, Oak, Chestnut Bud, Mustard, Sweet Chestnut”- For Good Luck, Abundances, Wealth, well being.

— Do this Daily, Hold A Bottle/Glass/Jug of Water, Milk, Juice, Tea, Coffee, Food… with a Right hand, Chant those mantras few times, in a quiet place, can chant silently too, thenconcerned person to Drink Charged Water/Drinks or food Daily 2-3 times daily for few months, until required.—–

Please check link, Click on SHOW MORE at the bottom of webpage, to load more content of a webpage.
http://www.reachnaran.com/category/debts-naran-blogs/

0Shares