Pran Hast Mudra Pran Hasta Mudra ( प्राण हस्त मुद्रा )

Next to Gyan Mudra, this is the second best sought after most useful hasta mudra which enables us, To Feel Safe & Secure by Providing Physical Immunity)

प्राण वायु, ब्रह्माण्ड-प्राण का वह विशेष कार्य है, जो मानव-शरीर को अनिवार्य ऑक्सीजन की आपूर्ति करता है। इसकी ऊर्जा नासिका-छिद्रों से फेफड़ों के आस पास व हृदय-स्तर तक प्रवाहित होती है।

प्राण मुद्रा योग की एक ऐसी मुद्रा है जो कई शरीरिक परेशानियों को सही करने का काम करती है। डायबिटीज और इससे जुड़ी समस्या में बहुत कारगर है। ये मुद्रा आंखों की रोशनी को सही करने के साथ डायबिटीज को कंट्रोल करने में बहुत लाभकारी होती है। प्राण मुद्रा कफ और अग्नि तत्व के संतुलन के लिए बहुत काम आती है।

डायबिटीज का कारण शरीर में पृथ्वी, जल और अग्नि तत्वों के असंतुलन ही होता है। प्राण मुद्रा इन तत्वों को संतुलित करने का काम करती है। इसलिए अगर आप स्वस्थ हैं तब भी या अगर आपको डायबिटीज है तब भी आपको प्राण मुद्रा करना बहुत जरूरी है। 

प्राण मुद्रा का अभ्यास अगर लंबे समय तक किया जाए तो ये शरीर में इंसुलिन के स्तर को बैलेंस करने का काम करता है। इतना ही नहीं प्राण मुद्रा का ये अभ्यास दिल से लेकर गले तक के रोगों के लिए भी खूब फायदेमंद होता है। प्राण मुद्रा का ये अभ्यास भूख और प्यास को भी नियंत्रित करने का काम करता है। इस अभ्यास से प्रतिरोधक क्षमता भी मजबूत होती है। तन-मन की दुर्बलता, थकान और नस-नाड़ियों की पीड़ा को दूर करने में में यह मुद्रा खास तौर से उपयोगी है, क्योंकि इससे रक्त शुद्ध होता है। रक्त वाहिनियों के अवरोध भी दूर होते हैं।

इस मुद्रा से मानसिक एकाग्रता भी बढ़ती है। तो अगरर आपकी आंखों की रोशनी कम हो रही है या फिर देर तक कंप्यूटर और टीवी को देखने से आंखों में जलन होता है या आंखें थक जाती हैं, तो प्राण मुद्रा करना फायदेमंद होगा। यह नेत्र रोगों में विशेष लाभकारी है। इसके अभ्यास से दृष्टि दोष दूर होता है।

अच्छा स्वास्थ्य की प्राप्ति अच्छे भोजन, अच्छे वातावरण ऐंवम सँग में हमारी आन्तरिक प्रतिरोधक-शक्ति, आन्तरिक इच्छा – “आत्मबल”- आन्तरिक सामर्थ्य से ही सम्भव होता है। जब ‘आत्मबल’ अन्दर से दृढ़ होता है, तब बाहरी शक्तियां हमें यदा-कदा ही नुकसान पहुंचाती हैं। प्राण मुद्रा संग नाड़ी शोधन प्राणायाम अभ्यास द्वारा इस आत्मबल प्राण-शक्ति को सक्रिय कर, हमें इम्युनिटी प्राप्ति होती है! प्राण मुद्रा रुट चक्र को तेज करती है, जिससे शरीर में अग्नि (आतंरिक उर्जा का संचार) और कंपन दोनों होने लगता है। इससे शरीर को ऊर्जा मिलनी शुरू हो जाती है। ये मुद्रा ह्रदय और आत्मा को जोड़ती है। प्राण मुद्रा कई बीमारियों का इलाज करने में बेहद फायदेमंद है

हम यूँ भी कह सकते हैं की डिप्रेशन-डायबिटीज जैसी 10 बीमारियों का रामबाण इलाज है प्राण मुद्रा!

आज के बिजी लाइफस्टाइल के चलते प्राण मुद्रा वो Panacia यानि Cure for All है जो डायबिटीज से लेकर डिप्रेशन तक की समस्याओं को दूर करने में मददगार है। प्राण हस्त मुद्रा शरीर में कफ और अग्नि दोषों को नियंत्रित करने में भलीभांति सक्षम है!

प्राण मुद्रा से ग्रह दोष शांतिप्राण हस्त मुद्रा अभ्यास से सूर्य (अनामिका उंगली – पृथ्वी तत्त्व) मंगल (अंगूठा – अग्नि तत्त्व) बुध (कनिष्ठिका उंगली – जल तत्त्व) तीनों ग्रहों ऐंवम तीनों तत्त्वों के आपसी संयोग से ही तीनों ग्रह ऐंवम तीनों तत्त्व सन्तुलित ऐंवम  शांत रहते हैं।

चूंकि हथेलियों में बुध ग्रह स्थान के निचले हिस्से में चन्द्र ग्रह का स्थान है, अतः प्राण मुद्रा का प्रभाव बुध ग्रह के सँग सँग – चन्द्र ग्रह भी सक्रिय ऐंवम सन्तुलित हो जाते हैं।
अब चूंकि सूर्य चन्द्र दोनों ग्रह – प्राण मुद्रा अभ्यास से सक्रिय व सन्तुलित हो जाते हैं तो ज्योतिष सिद्धान्त अनुसार चन्द्र ग्रह के बाईं तथा सूर्य ग्रह के दाईं आंखों के प्रतिनिधि होने से प्राण मुद्रा आ अभ्यास से हमारी दोनों आंखों की वीणाई दुरुस्त रहती है।  
अतः आँखों के लिए यह मुद्रा वरदान है जिन महानुभावों की नज़र कमज़ोर होती है।
इस के अतिरिक्त, यदि जन्म-कुंडली का दूसरे और बाहरवें भाव कमज़ोर हों अथवा पीड़ित हों तो वो सूर्य ऐंवम चन्द्र ग्रहों के दाहिने भाग (यानि दूसरे भाव ऐंवम बाएँ (भाग यानि बाहरवें) – आंखों के कारक होने से दूसरे ऐंवम बाहरवें स्थान सुदृढ़ हो – शुभ फल मिलने प्रारंभ होने लगते हैं व हम जीवन में सेफ ऐंवम सिक्योर महसूस करने लगते हैं। इस प्रकार से कुंडली में ६,८,१२, भावों से बने कुदोषों ऐंवम शनि ग्रह दोषों को भी इस मुद्रा द्वार ठीक किया जा सकता है।
अतः यह मुद्रा वास्तव में ही Safe and Secure /(pran-mudra) कही गई है।

 

प्राण हस्त मुद्रा के फायदे:-
1. शुगर व डायबिटीज बैलेंस:-
रोजाना दिन में नियमित अभ्यास से प्राण मुद्रा का अभ्यास अगर लंबे समय तक किया जाए तो इंसुलिन स्तर बैलेंस रह डायबिटीज कंट्रोल में रहती है व रक्त साफ रहता है।

2. भूख प्यास व वजन नियंत्रण:-
दरअसल, इस योग मुद्रा में भूख और प्यास कंट्रोल होती है, जिससे आप ओवरइटिंग से बच जाते हैं और वजन कंट्रोल में रहता है। यह योग मेटाबॉलिज्म दर को भी बढ़ाता है, जो वसा को खत्म करने में मदद करता है। इसके अलावा यह आपके पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है।

आंखों की रोशनी बढ़ाने में मददगार
नियमित रूप से प्राण मुद्रा करने से आंखों की रोशनी बढ़ती है। इतना ही नहीं, अगर आपको चश्मा लगा है आंखों से जुड़ी कोई अन्य परेशानी है तो वो भी इससे दूर हो जाएगी।

मजबूत इम्यून सिस्टम
कमजोर इम्यून सिस्टम बार-बार सर्दी जुकाम, बुखार और अन्य बीमारियों का कारण बनता है लेकिन इस आसन को करने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है। साथ ही प्राण मुद्रा पुरानी चक्कर की समस्या और कमजोरी को ठीक करने में मदद करता है।

पीरियड्स दर्द को करे दूर
जिन महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान तेज दर्द का सामना करना पड़ता है उनके लिए यह बेस्ट ऑप्शन है। इस आसन को करने से पीरियड्स दर्द, चिड़चिड़ापन और थकान आदि सभी समस्याएं दूर हो जाती हैं।

तनाव व डिप्रेशन
नियमित रूप से इस मुद्रा को करने पर मानसिक एकाग्रता और सहनशक्ति बढ़ती है, जिससे तनाव और डिप्रेशन जैसी समस्याएं भी दूर होती है।

कोलेस्ट्रॉल लेवल को करे कंट्रोल
इस आसन को करने से कोलेस्ट्रॉल लेवल भी कंट्रोल में रहता है, जिससे दिल की बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है। तो आप भी इसे अपनी रूटीन में जरूर शामिल करें।

त्वचा रोग में फायदेमंद
यह योग त्वचा रोगों को भी ठीक करता है। इससे त्वचा में लाल चकत्ते पड़ना, रैशेज, पित्ती आदि रोग ठीक हो जाते हैं। इतना ही नहीं, यह योग करने से शरीर में विटामिन्स की कमी भी पूरी हो जाती है।

शरीर को मिलती है ऊर्जा
रोजाना 20+ मिनट प्राण मुद्रा का अभ्यास करने से शरीर में ऑक्सीजन का स्तर बढ़ता है और कार्बन-डाईऑक्साइड बाहर निकलती है। इससे शरीर को दिनभर ऊर्जा मिलती है, जिससे आप कई बीमारियों से बचे रहते हैं।

ग्लोइंग स्किन
चेहरे की सुंदरता बढ़ाने के लिए महिलाएं बहुत से ब्यूटी प्रॉडक्टस का इस्तेमाल करती हैं लेकिन रोजाना यह आसन करके भी आप चेहरे का ग्लो बरकरार रख सकती हैं वो भी बिना किसी साइड इफैक्ट के।

सावधानियां:
अगर आपको सर्दी और जुकाम हैं तो इस मुद्रा को थोड़ी  देर ही करें।

 

  1. Uses:- Pran Mudra Facilitates the Energy Flow – “Since Pran” means “LIFE”. Thus, the practice of Pran Mudra is useful to strengthen our Pranic Energy or Life Vital Force or all the Five Pranas and Immunity and Vitality in our body.

It Activates Energy in Head for providing Physical Well-being & Immunity by Increasing the flow of life force energy by boosting energy and decreasing fatigue, improving sleep quality, stimulating the immune system!

Root Chakra Simulation for Powerful Grounding and Healing : Doing Pran Mudra stimulates the activation of Kundalini – our life force where it sits coiled in the Root Chakra, which is situated at the base of our spine. Its regular practice helps to maintain energy support balance for keeping our overall well-being by stimulating and balancing our root chakra and the flow of life force, which awakens and energise our spine and whole body organs by redirecting the energy by providing support to the persons struggling with addiction, improving ability to stand up for oneself, assisting to feel grounded by supplying energy to the body organs, wherever it is most wanted. To increase the power of the mudra, do Jap Dhyan sitting in this mudra by chanting ॐ लं नमः which is the mantra for the Root Chakra along with visualing its the color red by holding this mudra for 16+ minutes daily!

Pran mudra represents life force. It is believed that performing this mudra stimulates Basic Chakra and activates the flow of life force. In addition, this

  • Improve issues of the legs, feet or spine
  • Provide support for people struggling with addiction
  • Improve one’s ability to stand up for oneself
  • Assist with grounded feelings

Increase the power of the mudra by chanting the  “Lam beeja mantra,” (pronounced lahm) which is the mantra for the first chakra.If you are in a focused meditation, hold the mudra for 20 minutes or longer.You can also visualize the color red, which is the first chakra color, as you hold the mudra. practitioners refer to it as the healing mudra or the flow of life force energy. This Boost energy and decrease fatigue and Improve sleep quality and Stimulate the immune system also.

 

Pran or so called Vitality Mudra helps Savings also

Other Uses: It also removes free radicals from blood, Improves Vision of Life (putting one on job) & Eyes, Eye Nerves, Vitamins Absorption, Cures Tiredness, All Diseases Ending With .. “itis” like Gastritis etc etc.

If mind is in a solid container it will produce a sense of relaxation. Mind is here. Thought is no-where. The mind and thought are separated. The thinking is separated.  What else I can do? I can sleep. This Mudra can produce sleep also.

A few main benefits that are derived with the practice of Prana Mudra are the following:-

  1. Energy boost: The practice of Prana Mudra encourages energy boost in the body. It is believed to reduce tiredness and laziness in the body.
  2. Kapha and Pitta Element: The practice of Prana Mudra works on reducing the Pitta (Fire) element in the body while increasing the Kapha (Water) element in the body. Kapha (Water) helps to keep the joints lubricated while keeping the cells and the tissues protected due to the water element. Pitta (Fire) element is associated with the body temperature, emotions, thoughts and this is balanced with the practice of Prana Mudra.
  3. Builds immunity: With the increased energy flow through the body, it keeps the immunity in control.This when done with regular daily yoga practice would be beneficial.
  4. Calms the mind: The practice of Prana Mudra while helping in controlling and reducing the Fire element in the body, reduces the mental tensions including anger, agitation and restlessness. This calms the mind eventually.
  5. Arthritis: Prana Mudra with its practice increases the Kapha energy in the body, which helps to keep the joints lubricated taking care of arthritis.
  6. Hypertension: Prana Mudra is said to keep the blood pressure in control. Hence good for those suffering from high blood pressure.
  7. Premature aging: While this mudra keeps the various energies in the body like the Kapha and Pitta in control, it also ensures good circulation. With good circulation helps with premature aging.
  8. Reduces insomnia: A good practice when done regularly will help to heal the symptoms towards insomnia cooling the nervous system.
  9. Reduces diseases related to the eye: It is believed that the practice of Prana Mudra helps to keep the diseases related to the eye in control, like -red eye, dry eyes, cataract etc.

प्राण मुद्रा से ग्रह दोष शांतिप्राण हस्त मुद्रा अभ्यास से सूर्य (अनामिका उंगली – पृथ्वी तत्त्व) मंगल (अंगूठा – अग्नि तत्त्व) बुध (कनिष्ठिका उंगली – जल तत्त्व) तीनों ग्रहों ऐंवम तीनों तत्त्वों के आपसी संयोग से ही तीनों ग्रह ऐंवम तीनों तत्त्व सन्तुलित ऐंवम  शांत रहते हैं।

This Mudra called as Pran or Prana Mudra. This could be even done it – while lying down, before going to sleep; while walking; or may be when your manager bores you with his lectures!
Explanation 
The mental state worry links with the scarcity situation. Lack of money = Worry. Enough money on hand creates a mental state of Relaxation and Calmness. When you do this Mudra, you activate your calmness. This calmness in turn, brings money into your life.
A student of Naran S. Balakumar was about to be fired. He did this Mudra for few days. Within a week, his job contract was renewed and got a good hike too. His feedback is, “I didn’t know when I went to sleep. Therefore, I can’t say, whether this Mudra works or not!”
The additional benefit of this Mudra is that you will sleep like a child. A child feels safe and secure under the protection of his parents. Therefore, you would feel safe and secure too.
While you are Relaxed and Sleeping, the Universal Mind is Awake and it works very hard to get not only what you want, but also more than what you want!

Other benefits of doing this mudra

Vitality, elimination, relaxation, rest, calmness, composure, affectionate, and motherliness.

Not to be shaken by other’s anger – when somebody else is shouting or is angry, be in this mudra which activates composure.

This mudra activates the life force – meeting point of Fire,  Earth and Water elements.

Blood flow is regulated. Blood clots are reduced and excreted, muscles are strengthened, immunity is improved and promotes good sleep.

When one is worried and restless, additionally keep the index and middle fingers at the base of the thumb, while the ring and little fingers are touching the tip of the thumb.

Physical – for eye sight, for Diabetes.

 

How To: Touch The Tips of Water Element Little Fingers and Earth Element Ring Fingers with Fire Element Thumbs of both the hands.

Time: 20+Minutes/ Two to Three times daily.

A Finishing Mudra: 20+ Minutes Practice of Pran Mudra, after the following Mudras – increases the results many fold:-

(1) To Increase the benefits of:

Gyan Mudra for Stress Relieving & Sleeping Disorders (Insomnia),

Apan Mudra for Diabeties, Kidney, Digestion etc;

Apan Vayu Mudra for Heart & B.P.;

Surya, Linga Mudras for elimination of nasal and lungs mucous ;

(2) This Recovers & Heals Fast After-illness

 

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