प्रणायाम – महत्त्व व कैसे

        

प्राणायाम- ना तो अत्यंत द्रुतगति से और नहीं अत्यंत धीमी गति से वरन् सहज सामान्य गति से सर्वप्रथम इड़ा में 16 मात्रा तक वायु को खींचे, तत्पश्चात 64 मात्रा तक कुंभक करें और तब इसके बाद 32 मात्रा का समय लगाकर पिंगला नाड़ी से रेचन करें। इसके बाद दूसरी बार पिंगला नाड़ी से वायु खींचकर पहले की भांति ही सारी क्रिया संपन्न करें।
🌞👉 प्रात, मध्याह्र एवं सायं काल के समय नाड़ी शोधन प्राणायाम करना चाहिए क्रमश 80 कुंभक तक अभ्यास बढ़ा देना चाहिए।
🌞👉 इस तरह से 3 माह तक अभ्यास करने से नाड़ी शोधन हो जाता है। ऐसी शुद्धि होने से उस श्रेष्ठ साधक के देह में लक्षण भी दृष्टिगोचर होने लगते हैं। शरीर में हल्कापन मालूम पड़ता है ,जठराग्नि तीव्र हो जाती है, शरीर भी निश्चित रूप से कृश हो जाता है। ऐसे समय में योग में बाधा पहुंचाने वाले आहार का त्याग कर देना चाहिए।
यथेष्ट वायु धारण कर सकने के उपरांत ‘केवल कुंभक’ सिद्ध हो जाता है और तब रेचक और पूरक का परित्याग कर देना चाहिए।
परंतु प्रदर्शन कभी नहीं करना चाहिए वरन् स्वयं ही देख कर अपना उत्साहवर्धन करना चाहिए।
🌞👉 योगी का मल-मूत्र अति न्यून हो जाता है तथा निंद्रा भी घट जाती है निरंतर अभ्यास बढ़ाने से योगी को बहुत बड़ी शक्ति मिल जाती है। उस योगी का स्वरूप भी अत्यंत सुंदर एवं आकर्षक हो जाता है।
👉 भगवान श्रीहरि ने योगी पुरुष को लक्ष्य करके योग का तत्व समझाया है किंतु यदि स्त्री योग साधना करती है तो जो परिवर्तन योगी पुरुष में आते हैं, वही परिवर्तन योगिनी स्त्री में भी निश्चित रुप से आएंगे। इसलिए उच्च स्तरीय योग साधना करने वाली योगिनी स्त्री को भी उन्ही सावधानीयों से गुजरना होगा जो एक योगी पुरुष के लिए आवश्यक है।
🌞👉 तदंतर एकांत स्थल पर बैठकर मात्रा तीन मात्रा से युक्त ओमकार का जप करते रहना चाहिए, जिससे पूर्व जन्मों के पापों का विनाश हो जाए। यह ओंकार मंत्र सभी तरह के विघ्न बाधाओं एवं दोषों का हरण करने वाला है। इसका निरंतर अभ्यास करते रहने से सिद्धियां हस्त गत होने लगती है।
🌞 साधक के दो शब्द- अत्यंत आश्चर्य का विषय है योग विज्ञान की तरफ संपूर्ण विश्व आकर्षित हो रहा है, भारत का आम जन आज भी इस विज्ञान से कोसों दूर है क्योंकि भारत वर्ष में धर्म के आधार पर सिर्फ पाखंड का प्रचार किया जा रहा है ।इस शक्ति साधना पद्धति का प्रचार-प्रसार करने की जिम्मेदारी धर्म के ठेकेदारों ने अब तक नहीं समझी है। भाइयो, माताओं, बहनो! योग साधना पद्धति वह विज्ञान है, जहां पर आप यदि पूर्णतया साधना पथ पर अग्रसर होते हैं तो आप के लिए असंभव कुछ भी नहीं । संसार का ऐसा कोई लक्ष्य नहीं जिसे योगी साधक प्राप्त नहीं कर सकता। हां यदि आप योग के माध्यम से संपूर्ण सिद्धियों तक पहुंचना चाहते हैं तो आपको एक बात निश्चित रुप से समझनी होगी । संपूर्ण सिद्धियां प्राण शक्ति के अवरोध के बिना कभी भी जागृत नहीं हो सकती। ध्यान से भी कुंडलिनी शक्ति जागृत होती है किंतु जब तक आप कुंभक के साथ प्राणायाम का अभ्यास नहीं करते तब तक आप के शरीर को संपूर्ण दिव्यता प्राप्त नहीं हो सकती!

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