परमात्मप्राप्ति रास्ते – *भगवान्‌की शरणागति

*अनंत की और ग्रंथ से -*

परमात्मप्राप्तिके अनेक रास्ते हैं । पर सबसे बढ़िया रास्ता है‒ *भगवान्‌की शरणागति ।* इसको गीतामें भगवान्‌ने ‘सर्वगुह्यतमम्’(सबसे अत्यन्त गोपनीय) साधन बताया है (गीता १८ । ६४) ।

*यह शरणागति तब सिद्ध होती है, जब आप यह मान लेते हैं कि हम संसारके नहीं हैं ।*

यह आपके अधीन है, दूसरेके अधीन नहीं । भगवान्‌के शरण होनेपर संसारका काम इतना बढ़िया होगा कि कह नहीं सकते ! बहुत बढ़िया, सुचारुरूपसे काम होगा । कोई कमी नहीं आयेगी । आपका कल्याण भी हो जायगा, इसमें कोई सन्देह नहीं ! *केवल यह भाव बदलना है कि हम यहाँके नहीं हैं, हम भगवान्‌के हैं ।*

  • – स्वामी रामसुखदास जी महाराज
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