व्यान हस्त मुद्रा –

व्यान वायु :- हमारे शरीर में पांच तरह की वायु रहती है उसमें से एक का नाम है- व्यान। सारे शरीर में संचार करने वाली व्यान वायु से ही शरीर की सब क्रियाएँ होती है। इसी से सारे शरीर में रस पहुँचता है, पसीना बहता है और खून चलता है, आदमी उठता, बैठता और चलता फिरता है और आँखें खोलता तथा बंद करता है। जब यह वायु असंतुलित या खराब होती होती है, तब प्रायः सारे शरीर में एक न एक रोग हो जाता है।

व्यान हस्त मुद्रा निर्माण:-

दोनों हाथों की इंडेक्स ऐंवम मिडिल फिंगर्स की टिप्स को थम्बस की टिप्स सँग मिला कर रखने से व्यान हस्त मुद्रा का निर्माण होता है। अग्नि, वायु तथा आकाश तत्वों में संतुलन बनता है।
High ऐंवम low B. P. ऐंवम ह्र्दय रोग क्योर में उपयोग:- यह मुद्रा उच्च और निम्न, दोनों तरह के रक्तचापों में आश्चर्यजनक रूप से लाभ पहुंचाती है। । इससे न केवल उच्च रक्तचाप जल्दी ठीक होता है, बल्कि बाद में सामान्य भी रहने लगता है। यह मुद्रा हृदय से संबंधित रोगों में भी बहुत लाभकारी है।

अन्य उपयोग:-

हमारे शरीर में वात, पित्त और कफ का संतुलन बनाने के लिए यह काफी प्रभावशाली मुद्रा है। पिसाब ज्यादा आना, पेशाव में घात आना या रुक रुक कर आना या पेशाव में चीनी आना आदि रोग समाप्त होते हैं ! व्यान मुद्रा के नियमित अभ्यास से शुगर मधुमेह दूर होता है !

व्यान वायु सारे शरीर में घूमती है। इसका कार्य सभी स्थूल और सूक्ष्म नाड़ियों में रक्त संचार बनाए रखना है।
व्यान मुद्रा करने से ऑक्सिजन ऐंवम खून का संचार ठीक होता है तथा इससे सम्बन्धी रोग समाप्त होते हैं।

जल तत्त्व ऐंवम स्वाधिष्ठान चक्र से सम्बन्ध होने के कारण यह आनंद और सृजनात्मकता  को बढ़ाता है। महिलाओं के सारे रोग समाप्त होते हैं !

समय अवधि:-
रक्तचाप को सामान्य बनाए रखने के लिए इस मुद्रा को सुबह और शाम 20-30 मिनट तक करें।

0Shares