Updated : Oct 17, 2019 in Uncategorized

मातृशक्ति व्रत रखने वाले दिन अथवा कभी भी – प्राण हस्त मुद्रा करने से बने रहते हैं सारे दिन ऊर्जावान व भूख और प्यास नहीं करते परेशान

व्रत रखने वाले दिन अथवा कभी भी – प्राण हस्त मुद्रा करने से बने रहते हैं सारे दिन ऊर्जावान व भूख और प्यास नहीं करते परेशान

How To: प्राण मुद्रा में पृथ्वी तत्व वाली रिंग फिंगर-अनामिका और जल तत्व वाली लिटिल कनिष्टिका वाली दोनों उंगलियों के पोर अंगूठे के पोरों से लगाए जाते हैं। तर्जनी और मध्यमा को सीधा रखा जाता है। इस प्रकार प्राणवायु मुद्रा बनती है।: Touch The Tips of Water Element Little Fingers and Earth Element Ring Fingers with Fire Element Thumbs of both the hands.

Time समय अवधि: 16+Minutes – one to three times daily.

प्राण वायु मुद्रा के लाभ:- व्रत रखने वाले दिन – प्राण हस्त मुद्रा करने से सारे दिन ऊर्जावान बने रहने से भूख और प्यास परेशान नहीं करने के अतिरिक्त, इस मुद्रा के 16+मिनिटों के अभ्यास से निम्ननलिखित लाभ भी प्राप्त होते हैं:-

अपने नाम के अनुरूप, प्राण हस्त मुद्रा करने से हमारी प्राणशक्ति बढ़ती है। इसके अभ्यास से आँखों की रौशनी तेज होती है। शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। थकान दूर होती है। इसे ज्ञान मुद्रा संग करने से अनिद्रा की समस्या भी तुरंत दूर हो जाती है। यह स्वास्थ्य और ऊर्जा बनाये रखने में राम बाम सिद्ध होती है।

It also removes free radicals from blood, Improves Vision of Life (putting one on job) & Eyes, Eye Nerves, Vitamins Absorption, Cures Tiredness, All Diseases Ending With .. “itis” like Gastritis etc etc.

Role As A Finishing Mudra: 16+ Minutes Practice of Pran Mudra, after the following Mudras – increases the results many fold:-

(1) To Increase the benefits of:

Gyan Mudra for Stress Relieving & Sleeping Disorders (Insomnia),

Apan Mudra for Diabeties, Kidney, Digestion etc;

Apan Vayu Mudra for Heart & B.P.;

Surya, Linga Mudras for elimination of nasal and lungs mucous ;

(2) This Recovers & Heals Fast After-illness

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