“हट योग” – हठयोगप्रदीपिका अनुसार – “ह” यानि “सूर्य”, “ट” यानि “चन्द्र” – ऊर्जाओं के प्रवाह को “सुषुम्ना” मार्ग में प्रवाहित करके “सहस्रार चक्र” तक प्रवाहित कर देना ही “हठ योग” है।

हठयोग प्रदीपिका ग्रंथ अनुसार – “ह”का अर्थ है – सूर्य ऐंवम “” का अर्थ है “चंद्र तथा योग का अर्थ होता है “मिलाना अर्थात – सूर्य एवं चंद्रमा ऊर्जा-शक्तियों का मिलन।

हमारे शरीर के बायें ऐंवम दाहिने दोनों नासिका छिद्रों में स्थित – “इड़ा” यानि चन्द्र जो शक्ति कहलाता है ऐंवम मूलाधार चक्र में स्थित होती है तथा नेगेटिव एनर्जी/ सिम्पथैटिक नर्वस सिस्टम भी कहलाता है एवं “पिंगला” यानि सूर्य नामक जो दो केंद्र बिंदु हैं – जो पौरुष शक्ति है तथा मणिपुर चक्र में स्थित होता है व जो पॉजिटिव एनर्जी/ पारासिम्पैथीटिक नर्वस सिस्टम भी कहलाता है – उन को किन्हीं योग पद्धितियों (जैसे की – लोमविलोम प्राणायाम – श्री(शक्ति) राम / सीता(शक्ति) राम / हरे(शक्ति) राम बीजमंत्रों – रुद्र हस्त मुद्राओं आदि) की सहायता से उन्हें मिलाकर सम अवस्था में अथवा ‘सुषुम्ना” मार्ग में लाना ही हठ योग कहलाता है। सूर्य एवं चंद्र की ऊर्जा को हमारे दोनों नासिका छिद्र प्रवाहित करते हैं। दाँया नासा छिद्र पिंगला नाड़ी कहलाता है जो सूर्य स्वर है और बाँया नासा छिद्र इडा नाडी कहलाता है जो चंद्र स्वर है। इन्हीं दोनों स्वरों को सम अवस्था में लेकर सुषुम्ना स्वर में प्राण का प्रवाह कर देना ही हठयोग है अर्थात सूर्य चंद्र का मिलन करके सुषुम्ना मार्ग से सहस्रार स्थित परब्रह्म की ओर बढ़ना ही हठयोग है या यूं कहें कि मणिपुर चक्र स्थित सूर्य केंद्र में कुंडलिनी रूपी सूर्य की प्राण ऊर्जा को सुषुम्ना मार्ग के द्वारा उधर्वगामी करके सहस्रार चक्र स्थित परब्रह्म परमात्मा की चंद्र स्वरूपी आनंददायी ऊर्जा से संयुक्त कर देना ही हठ योग है। संक्षिप्त में – प्राण ऊर्जा के प्रवाह को सुषुम्ना मार्ग में प्रवाहित करके सहस्रार चक्र तक प्रवाहित कर देना ही हठ योग है।

योग शास्त्र में देखा जाए तो जैसे राम बीजमंत्र में -‘रा’ वर्ण को सौर ऊर्जा का कारक माना गया है। यह हमारी रीढ़-रज्जू के दाईं ओर स्थित पिंगला नाड़ी में स्थित है। यहां से यह शरीर में पौरुष ऊर्जा का संचार करता है। तथा ‘मा’ वर्ण को चन्द्र ऊर्जा कारक अर्थात स्त्री लिंग माना गया है। यह रीढ़-रज्जू के बांई ओर स्थित इड़ा नाड़ी में प्रवाहित होता है।
इसीलिए कहा गया है कि श्वास और निश्वास में निरंतर र-कार ‘रा’ और म-कार ‘म’ का उच्चारण करते रहने से दोनों नाड़ियों में प्रवाहित ऊर्जा में सामंजस्य बना रहता है। अध्यात्म में यह माना गया है कि जब व्यक्ति ‘रा’ शब्द का उच्चारण करता है तो इसके साथ-साथ उसके आंतरिक पाप बाहर फेंक दिए जाते हैं। इससे अंतःकरण निष्पाप हो जाता है। 

The easiest form of meditation for Sushumna Activation:-

Shree-Ram / Sita Ram / Hare Ram Hare Krishna mantras and the Kundalini Shakti:-
Ram as the symbolic of inner fire resides in Manipur chakra or solar plexus which burns away all the physical, mental, and spiritual impurities. While Shree as kundalini Shakti resides in Mooladhar or root chakra representing the earth element.
The Ram mantra ignite the internal fire that burns our all impurities and bad karma, while the Shree mantra activates the flow of prana in Sushumna Nadi , causing the upward movement of the Kundalini Shakti.

The subtle friction produced with the constant chanting of Shree Ram mantra, the Ida and Pingla nadis or sympathetic and parasympathetic nervous system gets activated and the Vagus Nerve or the Sushumna Nadi begins to vibrate and thus we can say that- Shree Ram mantra balances the both sides of brain.
Thus – the Shree Ram mantra in combined form recharge the whole body, all toxins, blockages and impurities are removed and self awareness becomes active.

How to chant Shree Ram Mantra?

Though this Beeja Mantra chanting can be practiced at any time and in any place, but it is advisable to practice it at regular time every day either early in the morning or before sleep at night in the following way:-
1) Sit in a comfortable posture. Relax the whole body and close your eyes. 
2) Chant rhythmically and with clear pronunciation and intensity of feeling the mantra Shree Ram-Jay Ram Jay Jay Ram- or Sita Ram Sita Ram or Hare Ram Hare Krishn.

3) Gradually try to shift the chant from audible chanting to whispering chanting to mental chanting over the period of time.

4) You may chant the mantra in whispering or mental form all the day in any time and in any place.
Benefits of chanting Shree Ram:-
Physical benefits: 
This powerful yet simple chanting immediately improves the health of the aspirant. Clear complexion, glow on face, lightness, sweet body odour, pleasantness of voice, slight excretion and gradual improvement of physical and mental health is indicated.

Psychic benefits:-It awakes the mysterious psychic awareness in the average individual as well as in the spiritual aspirant.

Psychic power of different varieties and magnitude come to an aspirant as he progresses in this path.

Mental benefits: It balances the both sides of brain hence restless and unstoppable mind becomes still, harmonious and balanced. It increases the mastery over mind and senses. It induces the sound sleep in the seeker by curing the problem of insomnia.

Emotional benefits:-It integrates the personality of the seeker. The behavior of the person starts transforming. The person will become sincere, honest, and straightforward in word, thoughts and actions.

Spiritual benefits:-
It induces one pointed devotion or Bhakti in the heart of the aspirant which is necessary for tasting the inner bliss. It protects us against all psychic attacks, black magic, negative thoughts and evil invisible entities.

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